“UP में शुरू होने वाला है ‘कैबिनेट की बड़ा सर्जरी’—कुर्सियाँ डरी हुई हैं!”

सुरेन्द्र दुबे ,राजनैतिक विश्लेषक
सुरेन्द्र दुबे ,राजनैतिक विश्लेषक

लखनऊ की राजनीतिक हवा में इन दिनों एक नई सुगबुगाहट है। सूत्र—जो हमेशा की तरह “नाम न बताने की शर्त” पर ही बोलते हैं—कह रहे हैं कि यूपी सरकार में अगले 100 दिनों में बड़ा ऑपरेशन होने वाला है। और बड़ा मतलब सच में बड़ा!

एक वरिष्ठ नेता का दावा है कि मुख्यमंत्री और खन्ना सहित केवल 9 मूल संगठन के चेहरे अपनी जगह पर रहेंगे—बाकी पूरी कैबिनेट की कुर्सियाँ डगमगा रही हैं।

मतलब साफ है—लखनऊ में ‘कैबिनेट रीमिक्स 3.0’ की रिकॉर्डिंग शुरू हो चुकी है।

कैबिनेट में “फुल रीसेट”: कौन जाएगा, कौन आएगा?

सूत्र बताते हैं कि इस बार खेल छोटा-मोटा नहीं, बल्कि पूरा “सिस्टम रिबूट” होगा। जिन चेहरों को अब तक कैबिनेट की कुर्सी ने VIP ट्रीटमेंट दिया था, उन्हें अगले 100 दिनों में Logout का नोटिफिकेशन मिल सकता है।

कहा जा रहा है कि संगठन के केवल 9 मूल कार्यकर्ताओं को ही सुरक्षा पास मिला है—बाकी कुर्सियाँ अपने भाग्य के भरोसे हैं।

सूत्रों के अनुसार, दो मिनिस्टर—जो हमेशा मंच पर चमकते रहते थे—अब शायद मंच से नीचे, बेंच पर बैठेंगे। राजनीतिक भाषा में इसे कहते हैं “डिग्निटी डिमोशन विद स्माइल!”

यानी मंत्री जी मंच पर तो नहीं होंगे, पर फोटो में जरूर दिख जाएँगे… पीछे की लाइन में।

लखनऊ के गलियारों में ‘कुर्सी योगासन’ चल रहा है

राजनीति में कुर्सी पर बैठना भी एक योग है—और उतरना तो उससे भी कठिन।

लखनऊ के गलियारों में इस वक्त जो माहौल है, वह कुछ ऐसा- कुर्सियाँ कांप रही हैं। फाइलें खुद को बैग में छिपा रही हैं। और मंत्री जी गूगल कर रहे हैं“How to survive cabinet reshuffle?”

सियासत ही ऐसी है—आज मंच पर, कल बेंच पर… और परसों शायद प्रेस कॉन्फ्रेंस में “मैं तो समर्पित कार्यकर्ता हूं” वाला बयान तैयार।

क्या बदलेगा यूपी का राजनीतिक गणित?

अगर यह मेजर ऑपरेशन सच साबित होता है, तो यूपी की राजनीति में आने वाले महीनों में- नए चेहरे, नई कैबिनेट, नई प्राथमिकताएँ और पुराने चेहरों के नए बयान, सब देखने को मिल सकता है।

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